छत्तीसगढ़
खरीफ सीजन 2026 की तैयारी पूरी, खाद-बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध
Shantanu Roy
31 May 2026 11:57 PM IST

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Korba. कोरबा। खरीफ सीजन 2026 को लेकर कोरबा जिले में कृषि विभाग ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। विभाग ने दावा किया है कि जिले में किसानों के लिए खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता है और किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी। किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक और बीज उपलब्ध कराने के लिए भंडारण और वितरण व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
कृषि विभाग के उप संचालक डी.पी.एस. कंवर ने बताया कि राज्य और केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप किसानों को संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके तहत जैव उर्वरक, जैविक खाद, हरी खाद और नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि कृषि लागत कम हो और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहे। उन्होंने बताया कि एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन प्रणाली के तहत किसानों को संतुलित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। सहकारी समितियों में पिछले वर्ष की मांग के आधार पर 80 प्रतिशत यूरिया और 60 प्रतिशत डीएपी का भंडारण किया जा रहा है, जबकि शेष मात्रा वैकल्पिक उर्वरकों और नैनो उत्पादों के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी।
जिले को सहकारी क्षेत्र में 12,700 मीट्रिक टन उर्वरक भंडारण का लक्ष्य मिला है, जिसके विरुद्ध अब तक 7,132.58 मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 56.16 प्रतिशत है। इसमें से 1,129.94 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया गया है, जबकि 6,002.64 मीट्रिक टन उर्वरक अभी भंडारित है। नैनो उर्वरकों की उपलब्धता की बात करें तो जिले में 6,842 लीटर नैनो यूरिया और 5,044 लीटर नैनो डीएपी सहित कुल 11,886 लीटर नैनो उर्वरक उपलब्ध हैं, जिनमें से 483.50 लीटर का वितरण किया जा चुका है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि नैनो उर्वरक पूरी तरह वैकल्पिक हैं और किसानों को इनका उपयोग करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा किसानों को जैविक खेती की ओर प्रोत्साहित करने के लिए ढैंचा और मूंग बीज का वितरण किया जा रहा है। विभाग द्वारा ढैंचा बीज 8 किलोग्राम प्रति एकड़ और मूंग बीज 4 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही नील हरित काई जैसे जैव उर्वरकों का उत्पादन भी विभिन्न कृषि संस्थानों और चयनित किसानों के खेतों में किया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नील हरित काई वातावरण में मौजूद नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर फसलों को पोषक तत्व उपलब्ध कराती है और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करती है।
उधर, उर्वरक वितरण और बिक्री व्यवस्था पर सख्त निगरानी भी रखी जा रही है। अब तक जिले के 115 उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण किया गया है, जिनमें अनियमितता पाए जाने पर 28 केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं 8 केंद्रों के विक्रय पर रोक लगाई गई है और एक केंद्र से 58 बोरी यूरिया जब्त की गई है। कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश पर पूरे जिले में उर्वरक भंडारण, वितरण और बिक्री पर सतत निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जमाखोरी, कालाबाजारी या किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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